सम्पादकीय
20-01-2026 Posted by: सम्पादक (पिघलता हिमालय)
अपराधी स्वयं में एक पार्टी होता है इसलिए हमेशा सच का साथ दें
उत्तराखण्ड में अंकिता भण्डारी हत्याकाण्ड में न्याय की बात करते हुए चारों ओर प्रदर्शन हो रहे हैं। इस प्रदर्शन में सबसे पहले तो उस वीआईपी को पकड़े की बात कही जा रही है जिसके बारे में अभी तक साक्ष्य नहीं मिला है लेकिन वायरल वीडियो और कहासुनी के आधार पर अनुमान लगाये जा रहे हैं। सच क्या है, इसे जानने के लिये स्व.अंकिता के माता-पिता सहित सभी लोगों ने सीबीआई जाँच की मांग की है। सरकार की ओर से सीएम ने भी आश्वस्त किया है कि वह हर प्रकार से जाँच करवाएंगे। इतना सब होने के बाद भी बहुत ही सीधी सी बात यह है कि जब किसी का नाम बहुत उछल जाता है तो क्या वह अपराध्ी हो जाता है? जब पूरा समाज किसी नाम को लेकर आन्दोलन की बाढ़ बन चुका हो तो क्या उस व्यक्ति को अपने पद से हटकर यह नहीं कहना चाहिये कि जाँच करवाई जाए? जब लोग उद्वेलित हैं और न्याय की मांग कर रहे हों तो क्या कोई बिचौलिया बनकर रास्ता बना सकता है? क्या किसी गरीब की बिटिया की मौत के बाद सोशल मी ...
आगे पढेंइच्छाशक्ति हो तो मंजिल दूर नहीं
20-01-2026 Posted by: सम्पादक (पिघलता हिमालय)
अपनी संस्कृति के नाम पर सबसे आसान उपाय बयान जारी करना या लटके-झटके मान लिया गया है लेकिन ‘रील’ की इस दुनिया में ठोस कार्य का वजूद हमेशा रहता है। ऐसे ही ठोस कार्य में जुटे हैं युवा जीतेन्द्र सिंह मपवाल। सामान्य रूप से देखने में लग सकता है कि जोहार नगर हल्द्वानी में यह व्यवसाय के लिये प्रतिष्ठान खोलकर बैठे हैं लेकिन उनका लक्ष्य अपनी परम्परा को दृढ़ता के साथ सींचना है। दादा भवान सिंह मपवाल के पोते और पिता जयसिंह माता श्रीमती वीजामती के घर मपवालबाड़ा, दरांती में जन्मे वीरेन्द्र लगन बचपन से ही कुछ अलग करने की रही है, जिस कारण वह शिक्षा व नौकरी आदि के लम्बे सफर को कम उम्र्र में पूरा कर अपने मूल में लौट पड़े। जय सिंह जी के पुत्रों में नारायण सिंह, गणेश सिंह, गंगा सिंह और वीरेन्द्र सिंह हुए। दरांती गाँव में ही प्राइमरी पढ़ाई के बाद इन भाइयों ने अपने रास्ते तलाशे और वीरेन्द्र भी लम्बे सपफर में शामिल हुए। इन्होंने दरांती से शुरु होकर जूनियर हाईस्कूल रांथी से, फिर इण्टर मुनस्यारी से करने के बाद दिल्ली में एमबीए किया। अपने इस सपफर में प्राइवेट कम्पनियों से जुड़कर कई अनुभव प्राप्त किये। सन् 2000 में अपने भाई गणेश के पास दिल्ली में थे जिन्होंने एक शोरूम में इन्हें काम दिलवाया। वीरेन्द्र ...
आगे पढेंरंग-बिरंगे नेताओं का सच उघाड़ने के लिय जनता सड़कों पर
20-01-2026 Posted by: सम्पादक (पिघलता हिमालय)
अंकिता भण्डारी हत्याकाण्ड को लेकर जिस प्रकार से उत्तराखण्ड में आग भड़की है दरअसल वह आम जनता का गुस्सा है। अंकिता का मसला तो चर्चा में आ चुका है, न जाने कितने मामले होंगे जिनका सच बाहर नहीं आ सका है। पृथक पर्वतीय प्रदेश बनने के बाद से नेतागर्दी की खेती के अलावा उत्तराखण्ड में हो भी क्या रहा है? तभी तो रंग-बिरंगे नेताओं का सच उघाड़ने के लिय जनता सड़कों पर उतर चुकी है। नेताओं पर अय्यासी के आरोप पहले भी लगते रहे हैं लेकिन जितना कुख्यातपना फैल चुका है वह डरावना है। इसमें महिलाएं भी शामिल हैं। महिला होने का लाभ उठाने वाली कुछ चुनिन्दा भी जनता की आंखों में आ चुकी हैं। लोक-लाज कोई भय न रखने वाले कितनी बेशर्मी तक जा सकते हैं इसकी झिलमिल तस्वरी लोग अप ...
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