सम्पादकीय

नियंत्रण तो होना ही चाहिये भूमि चाहे देवों की ही हो

📅 03 July 2026 ✍️ पिघलता हिमालय
उत्तराखण्ड को देवभूमि कहा जाता है और मान्यता है कि देवों का वास इस पर्वत प्रदेश में है। साधना और वीरता के किस्सों से भरा यह राज्य का परिचय का मोहताज नहीं है। पहाड़ के लोगों की ‘सरलता’ और ‘ठेठ पहाड़ीपन’ भी सब जानते हैं। सबका आदर-सम्मान करना और अपनी संस्कृति व मातृभूमि की सुरक्षा के लिये प्रतिब( पहाड़ी कौम में वह सब भी समाहित हैं जो इस पर्वत प्रदेश के वाशिन्दे हैं। इस भूमि को सौभाग्य मिला है कि इसके मूल निवासियों के अलावा शरणांगतों को इसने सहारा दिया। हिमालय जैसी इसकी विराट संस्कृति और सभ्यता होने के बावजूद हाल के वर्षों में जिस प्रकार का उपद्रव यहाँ होने लगा है वह कतई शोभनीय नहीं बल्कि सोचनीय है। आंखिर देवभूमि में यह सब क्या होने लगा
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