पिघलता हिमालय प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तकें और साहित्य
🏛️ पिघलता हिमालय | 2022
लोक का उत्साह हमेशा सच्चा होता है। ग्राम्य जीवन को जब शहर की हवा लग जाती है तब वह फुर्तीला जरूर दिखा...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2005
हिमालय संस्कृतियों का जनक है और आज भी इसकी आदि संस्कृति उपस्थित है। समय के साथ बहुत कुछ बदला है लेकि...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2013
‘‘उप्रेती’’ (राग-भाग हमारे) एक ऐसा दस्तावेज है जो आने वाली पीढ़ियों को बतायेगा कि उनकी जड़ें कहाँ हैं।...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2010
अपनी मातृबोली कुमाउनी से उप्रेती जी को बहुत लगाव था। वे प्रायः गंगावली क्षेत्र की मधुर कुमाउनी में ह...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2011
‘हौल्दार’ स्व.आनन्द बल्लभ उप्रेती जी की वह कल्पनाशीलता है, जिसे उन्होंने अपने मित्र डाॅ. गिरीश चन्द्...
₹100.00
🏛️ पिघलता हिमालय | 2014
‘अरमानों का मेला’ श्रीमती मंजू पांगती की कलम से निकले छन्दों का एक ऐसा रेला है जो कई तिहाईयों के बाद...
‘प्रेरणा’ स्व.आनन्द बल्लभ उप्रेती ;संस्थापक/सम्पादक पिघलता हिमालयद्ध की कविताओं का संग्रह है। ये उनक...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2010
‘रजनीगंधा मूल रूप से सन् 1965-66 की कृति है, जिसे स्व.आनन्द बल्लभ उप्रेती जी ने अपनी उस यात्रा के दौ...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2013
‘संगीत सुधा’ में संगीत सम्बन्ध्ी प्रश्नों का हल चार खण्डों में करने के साथ ही उत्तराखण्ड के राज्य के...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2011
गमनाम असंख्य कलाकारों ने कला के रूप देखे होंगे जिनका उल्लेख नहीं मिल पाता है। संगीत कला की एक ऐसी ही...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2012
गुरु-शिष्य परम्परा और घरानेदारी की संगीत शिक्षा से हट कर संगीत की शिक्षा ले रहे विद्यार्थियों व जिज्...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2013
पुरुषोत्तम राम की कथा को नाट्य रूप में सम्पूर्ण विश्व में देखा जाता है। भारतवर्ष में ही इस कथा की मं...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2012
भारत वर्ष के होली पर्व में वृज की होली का जो निराला रूप है, उसमें उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल की होली क...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2010
हिमालय की प्राकृतिक विविधता ने जिस तरह यहाँ की सांस्कृतिक विविधता को स्वरूप दिया है उसी तरह आस्था का...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2010
स्मृतियों के झरोखे में मेरी चार पी-िसजय़यों से सहेजी गई यादों और उन यादों के साथ जुड़ा अपनापन है। बच...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2012
यह इतिहास नहीं है उत्तराखंड राज्य आन्दोलन का। यह एक ऐसा सच है जैसा किसी जमाने में संजय ने अंधे धृतरा...
🏛️ पिघलता हिमालय | 2011
एक कुमाउनी मुहावरा है- सोच गुम पड़ जाना। ‘घोंसला’ की कहानियां प-सजय़ते हुए जाने क्यों यह शब्द मन में...
🏛️ पिघलता हिमालय प्रकाशन | 2010
उपेक्षा अभाव सनातन संघर्ष! पर्वतीय जन-जीवन के ये छोटे-छोटे स्याह-सफेद चित्र कहीं बहुत कुछ सोचने के ल...
पिघलता हिमालय ने 1978 से अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों और साहित्यिक रचनाओं का प्रकाशन किया है। उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के उद्देश्य से प्रकाशित इन पुस्तकों में लोकगीत, कविता, इतिहास और सामाजिक विषयों को समेटा गया है।
📞 प्रकाशन के लिए सम्पर्क करेंहिमालय की साहित्यिक धरोहर का संरक्षण