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📚 पुस्तक 2012

कुमाउँ का होली गायन: लोक एवं शास्त्र

✍️ डा. पंकज उप्रेती

🏛️ पिघलता हिमालय  |  वर्ष: 2012

पुस्तक परिचय / विवरण

भारत वर्ष के होली पर्व में वृज की होली का जो निराला रूप है, उसमें उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल की होली का स्वरूप भी कम नहीं है। यहां पर होली के दो स्वरूप- खड़ी व बैठ प्रचलित हैं। बैठकी होली ने गीत संगीत के आधार पर वर्तमान में अपना क्षेत्र विस्तृत कर लिया है किन्तु खड़ी होली गीत उससे कहीं ज्यादा लोकग्राही हैं। पहाड़ का बहुत बड़ा वर्ग खड़ी होली गीतों के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति देता आया है। खड़ी होली के माध्यम से समसामयिक घटनाक्रमों पर अच्छे कटाक्ष किए गए हैं। बदलती सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक परिस्थितियों को उद्घाटित किया जाता रहा है। इसमें मनोरंजन के साथ साथ लोकमानस की वास्तविक अभिव्यक्ति हुई है।
कुमाऊं का होली गायन : लोक एवं शास्त्र पुस्तक में होली परम्परा, खड़ी होली परिचय, बैठ होली परिचय, संगीत पक्ष, होली गीत, महिलाओं के होली गीत के साथ ही परिशिष्ट में जिज्ञासुओं के लिए स्वरांकन किया गया है।
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