राष्ट्रीय
हिमालय की पारिस्थितिकी तेजी से बदल रही है
📅 13 May 2026
✍️ पिघलता हिमालय
अल्मोड़ा। जीबी पन्त राष्ट्रीय हिमालीय पर्यावण संस्थान और सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के शोध् में बताया गया है कि हिमालय की पारिस्थितिकी तेजी से बदल रही है। शोधार्थियों ने अपने अध्ययन में पाया कि कई विदेशी प्रजातियों के पौध्े अलग-अलग स्थानों पर उंचाई वाले क्षेत्रों में पफैलकर स्थानीय जैव विविध्ता को प्रभावित कर रहे हैं।
जीबी पन्त राष्ट्रीय हिमालीय पर्यावण संस्थान और सोबन सिंह जीना विवि अल्मोड़ा के शोधार्थियों ने चम्पावत जिले के 9 ग्रामों में किए गए शोध् में पाया कि लैंटाना कैमारा, पार्थेनियम हिस्टेरोपफोरस, एजरेटिना एडेनोपोरा और बिडेंस फिलोसा जैसे विदेशी पौधे तेजी से फैल रहे हैं। पता चला कि 700 से 1200 मीटर की उंचाई वाले निचले इलाकों में लैंटाना और पार्थेनियम अध्कि मात्रा में फैल रहे हैं। इसके अलावा 1200 से 1700 मीटर की उंचाई में एजरेटिना और बिडेंस प्रजाति का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। 1700 मीटर से अधिक उंचाई वाल
जीबी पन्त राष्ट्रीय हिमालीय पर्यावण संस्थान और सोबन सिंह जीना विवि अल्मोड़ा के शोधार्थियों ने चम्पावत जिले के 9 ग्रामों में किए गए शोध् में पाया कि लैंटाना कैमारा, पार्थेनियम हिस्टेरोपफोरस, एजरेटिना एडेनोपोरा और बिडेंस फिलोसा जैसे विदेशी पौधे तेजी से फैल रहे हैं। पता चला कि 700 से 1200 मीटर की उंचाई वाले निचले इलाकों में लैंटाना और पार्थेनियम अध्कि मात्रा में फैल रहे हैं। इसके अलावा 1200 से 1700 मीटर की उंचाई में एजरेटिना और बिडेंस प्रजाति का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। 1700 मीटर से अधिक उंचाई वाल