सम्पादकीय

पर्यटक होेने और बेहूदे होने का फर्क समझना चाहिये

📅 09 July 2026 ✍️ पिघलता हिमालय
उत्तराखण्ड में पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर खूब प्रचार-प्रसार के साथ जिस प्रकार की छूट दे दी गई है, उससे चारों ओर आये दिन घपलत देखी जा रही है। असल में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही यह स्पष्ट होना चाहिये कि आने वाले मेहमानों को किस रूट से आना है, कितने समय को आना है, किन नियमों का पालन करना है, मेजवानी के लिये तैयार लोगों को भी उनका ध्यान रखना चाहिये, किसी प्रकार की आपात स्थिति में मसले को सुलझाने की त्वरित कार्रवाई होनी भी जरूरी है। लेकिन देखने में आ रहा है कभी पर्यटकों का आपस में तो कभी स्थानीय लोगों के साथ उलझना, झगड़ना, रौबबाजी, गुटबाजी जैसा कारनामा हो रहा है।
धार्मिक पर्यटन के अलावा प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण लोग उत्तराखण्ड आना चाहते हैं और मय परिवार के
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