सम्पादकीय

पुलिस और प्रशासन की मजबूरी मतलब सब चौपट

📅 09 September 2026 ✍️ पिघलता हिमालय
उत्तराखण्ड में नेताओं के बोल जिस प्रकार से सुनाई दे रहे हैं उससे साफ दिख रहा है कि हमारी पुलिस व्यवस्था और प्रशासन को लाचार बनाया जा रहा है। छुटभैये नेता भी सड़क चलते सवाल उठाने के अलावा कार्यालयों, थाना चौकियों में जाकर हंगामा करने को अपनी उपलब्धि समझने लगे हैं। इस प्रकार की हरकतों को सोशल मीडिया पर प्रचारित करते हुए अपनी ताकत को बताया जा रहा है। किन्हीं मामलों में लुंज-पुंज व्यवस्था और लापरवाह या सत्तालोभी अधिकारी भी दिखाई देते हैं। यह दोनों ही स्थितियां लोकतन्त्र को चौपट करने वाली हैं।
पुलिस और प्रशासन का अपना कार्य है, जिसमें किसी प्रकार हस्तक्षेप सत्ता या विपक्ष ने नहीं करना चाहिये। इ
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