छात्र संघ चुनाव का तमाशा
छात्र संघ के नाम पर बढ़रहे हंगामे को देखते हुए बीच में अधिकांश का मोह भंग हो गया था। लिंगदोह समिति की सिफारिशों के बाद छात्र नेताओं की अकड़ कम हो गई थी। कोरोना काल व उसके बाद जब छात्र संघ चुनाव नहीं हुए तब कालेज प्रशासन ने राहत की सांस ली। लेकिन राजनीति के साथ जुड़कर अपने लाभ के रास्ते देखने वालों को चैन कहाँ? हंगामा होने लगा कि चुनाव करवाए जाएं। दूसरी ओर छात्र नेताओं को अपने पाले में करने की चाह हर बड़े नेता को होती है। ऐसे में छात्र संघ चुनाव का माहौल बनने लगा और राजनीतिक पार्टिय