सम्पादकीय

गुण्डागर्दी और भ्रष्टाचार

📅 07 October 2026 ✍️ पिघलता हिमालय
उत्तराखण्ड में छात्र संघ चुनाव में इस बार सारे पुराने रिकार्ड तोड़ते हुए गुण्डागर्दी का अध्याय जुड़ चुका है। ऐसे में उच्चशिक्षा से जुड़े विद्वतजनों ने एकजुटता दिखाते हुए ऐलान किया कि किसी भी तरह की गुण्डई के खिलाफ चुप नहीं रहेंगे। लेकिन क्या ऐसा हो सकता है? आंखिर छात्रों की इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि वह अपने गुरुजनों के खिलाफ उग्र हैं। गलती क्या छात्रों की है या गुरुजनों की?
उच्चशिक्षा की जड़ में जाएं तो पता चलता है कि गलती दोनों ओर से होती रही है। इतना जरूर है कि पहले गुरु का मान रखते हुए छात्र शान्त हो जाते थे और गुरु जी भी सुलझी बात करते थे परन्तु समय के साथ अशान्ति बढ़ती जा रही है। शिक्षा के नाम पर कितनी पढ़ाई हो रही है, मोटी पगार लेने वाले अपने कार्य के प्रति कितना ईमानदार हैं, विभिन्न मदों में आई राशि का किस प्रकार से व्यय होता है, ऐसी सारी बातों को लेकर आजकल बच्चे चौकन्ने हैं। यही कारण है कि वह मौका देखते ही भ्रष्टाचार की पूंछ पकड़ना चाहते हैं। कहीं पर कुछ गड़बड़ मिली तो आन्दोलन होना ही है। इस प्रकार के कई किस्से हो चुके हैं जब भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए, छेड़छाड़ का
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