सम्पादकीय

भ्रष्टाचार और अत्याचार दोनों ही नहीं होने चाहिये

📅 17 September 2026 ✍️ पिघलता हिमालय
उत्तराखण्ड आये दिन भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए हंगामे होने लगे हैं। साथ ही अत्याचार की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं। शान्तप्रिय पर्वत प्रदेश में यह सब क्या होने लगा है? दरअसल सबकुछ समेटने की होड़, समाज में हाबी होने की आदत, अपने बर्चस्व की लड़ाई, चापलूसी कर आगे बढ़ने वालों के कारण समाज में यह सब होने लगा है। गलत करने के बाद भी अपने को सही ठहराने की जिद समाज तोड़ने वाली है। बात और व्यवहार में छिछोरापन करने वाले यह भूल रहे हैं कि उनकी हरकतों का कितना गलत प्रभाव हो रहा है।
लोहाघाट विधायक खुशाल सिंह अधिकारी ने अधिकारियों को भ्रष्ट बताते हुए जिस प्रकार का हंगामा किया वह बेहद चर्चा में है। विधायक ने कहा- चिल्लाना मेरा अधिकार है। बहस के बीच एपीडी अधिकारी ने भी आरोप लगाया कि दुग्ध विभाग आंचल की डेयरी में आपने किसी को रखने के लिये कहा, मैंने आपका कहा नहीं माना। विधायक और अधिकारी की बातें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। नेता जी और अधिकारी में कौन कितना सच है यह तो जाँच में पता चलता लेकिन पूरा प्रकरण भाजपा
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